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नारी शक्ति

Posted On: 9 Mar, 2014 Others में

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जगतजननी जगदम्बा आदिशक्ति का स्वरुप हूँ मैं,
आँचल में समेटे, दूध पिलाती उस ममता का दुलार हूँ मैं,
जिस शब्द से शुरू होती, मानव की पहचान हूँ मैं,
उस शब्द से उज्ज्वलित होती, नारी शक्ति का नाम हूँ मैं,
जन- जन के मुख में बसते, उन राम का नाद हूँ मैं,
रामायण में महकती, सीता नाम पर उन राम का आत्मविश्वास हूँ मैं,
श्रीकृष्ण की आधी काया में गहराती, राधा नाम का प्यार हूँ मैं,
जिन बुंदेलों से सबने सुनी, उस मर्दानी की कहानी हूँ मैं,
खूब लड़ी उसी मर्दानी, झाँसी का अभिमान हूँ मैं,
संसद के मुद्दे सुलझती, उस कुर्सी का सम्मान हूँ मैं,
गगन को छूती, आसमान नापती, उस परिंदे की उड़ान हूँ मैं,
जिस शब्द से शुरू होती, मानव की पहचान हूँ मैं,
उस शब्द से उज्ज्वलित होती, नारी शक्ति का नाम हूँ मैं.

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

March 9, 2014

बहुत सुन्दर /सार्थक अभिव्यक्ति .बधाई

Neha Verma के द्वारा
March 10, 2014

thank u Shalini ji… :)

meenakshi के द्वारा
March 12, 2014

नेहा जी बहुत सुन्दर व सार्थक अभिव्यक्ति , बहुत -२ बधाई ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

Neha Verma के द्वारा
March 12, 2014

thank u Meenakshi ji… :)

Madan Mohan saxena के द्वारा
March 13, 2014

मनमोहक सार्थक रचना ,होली कि अग्रिम शुभकामना आभार मदन कभी इधर भी पधारें

Neha Verma के द्वारा
March 13, 2014

धन्यवाद मदन जी ! आपको भी होली की बहुत शुभकामनाये।


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