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हिंदी का सम्मान

Posted On: 13 Mar, 2014 Others में

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चीखती चिल्लाती मैं, दम तोडती मैं.
अंधेरो के साये में,गरीबी में जीती मैं.
हूँ गरीबों की शान मैं,
झांकती टूटती झोपड़ी से मैं.
अंग्रेजो के दामन से छूटी मैं,
तो अपने लोगो से मर गयी मैं.
नेहरु गाँधी युग की शोभा से सजी मैं,
फिर भी हूँ अपनों में बेगानी सी मैं.
आज़ादी के बाद उर्दू तो बन गयी पाकिस्तान की शान,
फिर क्यों रह गयी आज अंग्रेजी की गुलाम मैं.

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Maharathi के द्वारा
June 17, 2015

नेहा वर्मा जी सादर नमस्कार।। बहुत ही गम्भीर प्रश्न उठा रही हैं। साहस के लिए धन्यवाद। मैंने आपकी समस्त रचनाओं को पढा और अपने पैमाने के आधार पर रेटिंग कर दी है। शायद पसंद आये, धन्यवाद।। महारथी।।

Neha Verma के द्वारा
June 17, 2015

dhanyabad Maharathi ji…maine aapke blogs me apne comments post krne ki koshish ki lekin wo ho nhi rhe the… chama kariye…


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