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उसका बह जाता पसीना, खून की धार बनकर !

Posted On: 8 Jun, 2014 Others,social issues,कविता,Junction Forum में

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हर तरफ आग की तरह बरसती गर्मी से सभी परेशान है जो अपना कहर हर उस इंसान को बनाती ही है जो उसकी सत्ता को स्वीकार नही करते है. जो कमजोर होते है आसानी से उसका कोप सहन नही कर पाने के कारण जीवन से हाथ धो लेते है. कुछ इसी तरह उस किसान के साथ भी होता है जो दिन रात मेहनत करता है सुलगती गर्मी में. इस कविता में उस दम तोड़ते किसान की हालत बयां करने की कोशिश की गयी है जो बारिश न होने के कारण हीन अवस्था में आ गया है और उसकी भूमि सूख रही है…

तड़प रहा है वो अंगारा बनकर !
चीखती धूप में बह जाता है पसीना,
खून की धार बनकर !
कब आओगे बदरा,बह कर अमृत की तरह
डोल जाये हरियाली, सुहागन बन कर !
प्यासी आँखें तरसे रस्ता,
लालिमा की बूँद कब बन बहेगी
नीली चादर की तरह !
वो पेड़ भी बचा नही, जहाँ आत्मा झूल जाये,
लगा कर फाँसी का फंदा !
खेत तरस रहे है, दो बूँद पानी को तेरे !
घर पड़ा है सूना, बेबस रोती उसकी पत्नी,
घर के टूटे दीये से, करने को उजियारा !
हाँफ रहा है उसका बच्चा,
भूखे पेट अनाज को तरसता !
कहाँ से लाये रोटी चादर,
ढँक दे तन को, बना कर प्रहरा !
बचा ले बिकने से खुद को,
गिरते मनोबल की लज़्ज़ा !
डूब रहा है वो झूठे क़र्ज़ में,
मैली होती इज़्ज़त की तरह !
बेबस है बेचारा किसान,
पाने को खुद दो मुट्ठी आनाज !
कब बरसोगे बदरा, गीले पतझड़ की तरह !
सूखे मिटटी के ढेर बन जाये,
मुस्कुराते हरियाली से पेड़ !
तोड़ दो आकर घमंड, इस सुलगते सूरज का !
बस जाओ हर नज़र में,
सुख से भरते जैसे आवास !
प्यासी चिड़ियाँ,दम तोड़ते जानवर
चमक रहे है चील कौवे, रोशनी सी आँख में !
बंज़र होती भूमि कह रही मत मारो मुझको,
बनाकर आग में तड़पते, रेगिस्तान की छाया !
अब तो बरसो बदरा, अमृत के उजियारे की तरह !
मार रहा है वो हर पल अपनी अंतरात्मा को,
चीखते गिरते जमीन में लाल आंसूओं की धार सा !
उसका बह जाता पसीना, खून की धार बनकर
कब आओगे बदरा बहकर, अमृत की तरह !

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

June 8, 2014

सार्थक व् सुन्दर अभिव्यक्ति .बधाई

June 8, 2014

सार्थक अभिव्यक्ति .बधाई

KKumar Abhishek के द्वारा
June 8, 2014

नेहा वर्मा जी, सुप्रभात रविवार! बेहतरीन, सुस्पष्ट, और मार्मिक कविता ….और अन्नदाता हमारे किसानों के कठिन जीवन का जीवानस्पर्शी काव्य चित्रण के लिए, बधाई! आपको पढ़ना सौभाग्य हमारा…..प्रस्तुतिकरण के लिए धन्यवाद!

Neha Verma के द्वारा
June 8, 2014

धन्यवाद शालिनी जी…

Neha Verma के द्वारा
June 8, 2014

धन्यवाद अभिषेक जी ब्लॉग में पधारने और कविता के मंथन के लिए…

jlsingh के द्वारा
June 9, 2014

बहुत ही सुन्दर और सुस्पष्ट अभिव्यक्ति !

Neha Verma के द्वारा
June 9, 2014

thank you singh ji…

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 11, 2014

सार्थक भावाभिव्यक्ति किसान के दिल के दर्द की .आभार

sadguruji के द्वारा
June 12, 2014

कविता का विषय बहुत समसामयिक है,परन्तु कविता की लय कहीं कहीं पर बिखर गई है ! एक अच्छे प्यास के लिए बधाई !

Neha Verma के द्वारा
June 12, 2014

dhanyabad sadguruji ye sirf ek choti si koshish thi… aage accha karne ki koshish karungi…


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