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वो आज भी अपनी राजकुमारी कह कर बुलाते है मुझे !

Posted On: 15 Jun, 2014 Others,कविता,Junction Forum में

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चढ़ते नंगे पैरो से
इबादत की सीढ़ियों में
सँभालते थे मुझे,
मेरे नन्हे हाथो को
अपने हाथो से थामकर,
उस ईश्वर से रूबरू
कराते थे मुझे,
जब मैं चोरी से
आँख खोल कर देखती,
वो प्यार से निहारते थे मुझे,
संस्कार अभिव्यक्ति के
प्रथम पाठ में
फेल होने पर,
प्यार से समझा
रहे होते थे मुझे,
वो गुड़ियाँ के खेल में
मम्मी के डांटने पर,
हाथो के पालने में झुलाकर
चुप कराते थे मुझे,
ज़िन्दगी के कश्मकस से
गुजरते हुए,
उन तकलीफों
को सहते हुए,
सारे सुख उपलब्ध
करा जाते हैं मुझे,
पीछे हटते
लड़खड़ाते मेरे सपनो को,
वो दुआं की ताबीज़ से
हौसला दे जाते हैं मुझे,
नम्र विनम्र भाव
अविभाव की सीख देकर
उगते सूरज सी
चमक दे जाते है मुझे,
उलझनों से शिकस्त खाती
इस ज़िन्दगी में
वो सच्चे दोस्त की तरह
समझाते है मुझे,
उनकी गुड़ियाँ
उनकी दुलारी हूँ मैं,
वो आज भी
अपनी राजकुमारी
कह कर बुलाते है मुझे !



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

नितिन शर्मा के द्वारा
June 16, 2014

it feels so good to see youth generation who still have faith and interest in Hindi. Best of Luck!

jlsingh के द्वारा
June 16, 2014

बिटिया जो सबसे प्यारी है लगती वह राजदुलारी है , पापा के क़दमों में बैठी मम्मी की भी वह प्यारी है. आपको पितृ दिवश की शुभकानाएं

deepak pande के द्वारा
June 16, 2014

वाह संवेदनाओं से भरी कविता सच बेटियां पिता के बहुत करीब होती हैं

Neha Verma के द्वारा
June 16, 2014

thankyou Nitin ji…dis is my state language n i feel proud 2 write in Hindi…

Neha Verma के द्वारा
June 16, 2014

धन्यवाद सिंह जी… आपको भी पितृ दिवस की हार्दिक बधाई।

Neha Verma के द्वारा
June 16, 2014

धन्यवाद दीपक जी… आपको पितृ दिवस की बधाई।

sanjay kumar garg के द्वारा
June 19, 2014

“मेरे नन्हे हाथो को अपने हाथो से थामकर, उस ईश्वर से रूबरू कराते थे मुझे” सुन्दर अभिव्यक्ति करती कविता! बधाई! आदरणीया नेहा जी!

pkdubey के द्वारा
June 19, 2014

बहुत अच्छी कृति.पिता पालन हार और पथ प्रदर्शक है.सादर आभार और बधाई आप को मैम.

बहुत ही भावपूर्ण.. सुंदर अभिव्यक्ति ..हृदयस्पर्शी! नेहा जी हार्दिक बधाई..

Neha Verma के द्वारा
June 19, 2014

thank u Shilpa ji…

Neha Verma के द्वारा
June 19, 2014

dhanyabad dubey ji…

Neha Verma के द्वारा
June 19, 2014

dhanyabad Sanjay ji…

aman kumar के द्वारा
June 20, 2014

आपके पिता के लिए हम दुआ करते है , आपको भी अपनी जिम्मेदारी और प्यार उसी प्रकार से या कही जायदा निभनी है , अति सुंदर रचना

shailesh001 के द्वारा
June 21, 2014

बहुत ही प्यारी अभिव्यक्ति …. पिता को अभिवादन

sadguruji के द्वारा
June 21, 2014

वो सच्चे दोस्त की तरह समझाते है मुझे, उनकी गुड़ियाँ उनकी दुलारी हूँ मैं, वो आज भी अपनी राजकुमारी कह कर बुलाते है मुझे ! बहुत भाव विभार करने वाली रचना ! हर दृष्ट्री से बहुत उत्कृष्ट रचना ! बहुत बहुत बधाई !

Neha Verma के द्वारा
June 21, 2014

dhanyabad Aman ji… ji bilkul meri jimmedari unse jyada banti hai… mai aapke sujhav pr amal karungi…dhanyabad…

Neha Verma के द्वारा
June 21, 2014

dhanyabad Shailesh ji… mai apne Papaji ko is bare me jarur bataungi…

Neha Verma के द्वारा
June 21, 2014

dhanyabad Sadguruji…

Santlal Karun के द्वारा
June 24, 2014

आदरणीया नेहा जी, पिता की बरगद-जैसी छत्रछाया, आत्मीय स्नेह, अनुपम सम्बन्ध तथा पावन पितृत्व को आप ने अपने स्नेहिल शब्दों से सुन्दर गौरव प्रदान किया है | नई पीढ़ी को यह कविता अवश्य पढ़नी चाहिए — “उलझनों से शिकस्त खाती इस ज़िन्दगी में वो सच्चे दोस्त की तरह समझाते है मुझे, उनकी गुड़ियाँ उनकी दुलारी हूँ मैं, वो आज भी अपनी राजकुमारी कह कर बुलाते है मुझे !” … हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

Santlal Karun के द्वारा
June 24, 2014

आदरणीया नेहा जी, पिता की बरगद-जैसी छत्रछाया, आत्मीय स्नेह, अनुपम सम्बन्ध तथा पावन पितृत्व को आप ने अपने स्नेहिल शब्दों से सुन्दर गौरव प्रदान किया है | नई पीढ़ी को यह कविता अवश्य पढ़नी चाहिए — “उलझनों से शिकस्त खाती इस ज़िन्दगी में वो सच्चे दोस्त की तरह समझाते है मुझे, उनकी गुड़ियाँ उनकी दुलारी हूँ मैं, वो आज भी अपनी राजकुमारी कह कर बुलाते है मुझे !” … सहृदय साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

Santlal Karun के द्वारा
June 24, 2014
Neha Verma के द्वारा
June 25, 2014

dhanyabad Karun ji… aapne sundar pratikriya k dwara mera man badaya dhanyabad…

Neha Verma के द्वारा
June 25, 2014

dhanyabad Yogi ji…


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